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जीवनयोगिनी विमलाजी
१
- अबू पहाड पवित्र | रम्य सुंदर परिसर |
- व्यासांनीही माहात्म्य | त्याचे वर्णिले अपार |
- तेथे असे शिव कुटी | विमलेची हो ती कुटी |
- हिमालयस्थ जणू | शिवाची हो ती कुटी |
- तीन वाजताची ठरलीसे | दीदी माँ ची माझी भेटी |
- कुतूहल मनी | विविध विचार दाटती |
- प्रवेशिताच आत | स्पर्शे भाव घनीभूत |
- ‘पावसी’चा च भास |प्रत्यय मजसी हो येत |
- मूर्ती प्रेमळ ती धीट | खुर्ची बसलेली नीट |
- दृष्टी कृष्णमुर्तींची थेट | दर्शनी होय मी विस्मित |
- ज्ञानेश्वर, अरविंद, कृष्णमूर्ती अन् दादा, अनेक आठवणी दाटत |
- राजकारण्यांच्याही गोष्टी सवे काही काही त्या होत |
- विचार अति सुस्पष्ट अन् आवाज खणखणीत |
- आत्मानुसंधानाची भक्ति | उलगडे सोप्या शब्दांत |
- साधेपणा जीवनाचा होय त्या कुटीत प्रतित |
- अंजली, वीणा, शिल्पा कन्या असती नित्य सेवेत |
- पुस्तकेही काही वाचण्या, मजसी दीदी भेट देत|
- कृपाशिर्वाद घेवोनिया | दीदी माँ चा निरोप घेत |
- पाऊण तासांची ही भेट | कधी संपली ना ध्यानात |
- जीवन योगिनीची ही | अशी अविस्मरणीय भेट |
- राहे अखंड मनात | वाटे धन्य मी मनात !
- — १९ फेब्रुवारी २००९
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२
- ** जीवनयोगिनी भावसुमनांजलि **
- जाऊ कसा मी अबूला | न दिसेल माता मजला |
- प्रवेशु कसा शिवकुटीला | दीदी माँ न दिसती मजला |
- न दिसेल या नयनाला | जीवनयोगिनी परत अशी विमला |
- विचारही न पटे मनाला | कल्पिता रित्या शिवकुटीला |
- साधका दीपस्तंभ अबूला |आज असे तो ढासळला |
- आठवणींचा डोह उसळला | दर्शना द्विवार मजला |
- मूर्ती प्रेममय सबला | शोभती कन्या ज्ञानेशाला |
- जाणिले न कोणी तिजला | गुप्त तिच्या कार्याला |
- साधका बोध जीवनाला | करितसे धन्य जीवनाला |
- अंतरी पवित्र करण्याला | गंगाजळ जी ही विमला |
- विचार येतो मजला | हा ओघ अवचिता आटला |
- न करवते कल्पना मजला | वीणा शिल्पा अंजलीला |
- ज्या नित्य सादर सेवेला | कोण जाणी दु:खी ह्रदयाला |
- न कळेचि ह्रदयी मजला | कसे करू सांत्वनाला |
- आवरिले स्वत: मी मजला | जागृत झाल्या विवेकाला |
- मग खूण कळली मनाला | न गेली सोडूनि माता मजला |
- दृष्यातुनी जरी परतली | अदृश्य बैसली मम ह्रदयाला |
- मी अखंड जपेन तिजला | ह्रदयी माता जणू मम बाळाला |
- सामर्थ्य कळले आज मजला | शिवकुटीच आज मज ह्रदयाला |
- जाऊ कशाला मी अबूला | ह्रदयकुटीत दर्शन नित्य हो मजला |
- दीपस्तंभ न तो कोसळला | ब्रम्हांडभरी पसरला |
- सत्साधका प्रत्येका जाणवला | प्रवेश निज ह्रदयाला |
- दर्शन घडे ज्या ज्या पिंडाला | भेट घडवेल ब्रम्हांडाला |
- लाभता विमल कृपेला | अनुभव पिंड ब्रम्हांड ऐक्याला |
- दीपस्तंभ खुणावी मजला | चल उठ गाठ ध्येयाला |
- प्रेमाशिर्वाद कृपेला | नित्य जपतो मम ह्रदयाला |
- नमितो पावन पदकमलांना | नित्य मी माता विमलेला |
- मम ह्रदय भाव सरितेला | हा ओघ दाटूनि आला |
- प्रवाह अनिवार गमला | कवितारुपे हा प्रकटला |
- या भाव सुमन हाराला | अर्पिले आज विमलेला |
- तोषिता हास्य विमलेला | पाहुनि गमे धन्य अजि मजला |
- — २२ मार्च २००९
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३
- ** विश्वाकार विमला माता **
- विश्वाकार विमला, खुणाविते मजला |
- पुसते जीवन मंत्र, कळला का तो तुजला |
- मित्रभावे अखंड जो मी, सर्वां सांगितला |
- जीवनाची समग्रता, सर्वत्वे अनुभण्याला |
- दिव्य सर्व कर्मांनी, ईश्वरा पूजण्याला |
- जीवनाभिमुख होऊनि, जीवन जगण्याला |
- धरूनि ठेवी निजमनी, ह्या जीवन मंत्राला |
- आशीर्वाद अर्पिला मजला, कृतार्थतेने जगण्याला |
- आली प्रचित मजसी, सोडिले न माते मजसी |
- सूक्ष्मात त्या परतता, अखंड हित मज ती लक्षी |
- विश्वाकार माता विमलेला, मी बाळ अखंड लक्षी |
- प्रभूचरणा साक्ष ठेवुनी, अलक्षी विमलेला मी लक्षी |
- — २२ मार्च २००९
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४
- ** विश्वाकार विमला माता **
- विश्वाकार विमला, जागवते मजला |
- ध्येयाप्रत जाण्या, स्फूर्ति ती मजला |
- सूक्ष्मात ती परतता, सूक्ष्मरुपे बोधाया |
- सूक्ष्मात कार्य करिते, विश्वचेतना बनुनिया |
- देहाची खोळ सोडिता, नच बंधन उरले तिजला |
- पूर्ण शक्ति स्वातंत्र्ये, लागली बोध कार्याला |
- सूक्ष्मातल्या संत लोका, आनंद विमल परतता |
- स्वानंद विश्वी पसरविण्या, हुरूप त्यांसी आता |
- स्वानंद भान घेता, मज नमन विश्व विमला |
- कृपादृष्टी होता, लाभेन भक्ति अमला |
- — २३ मार्च २००९
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५
- आत्मा विमल | देह विमल |
- स्थिति विमल | मति विमल |
- बोध विमल | दृष्टी विमल |
- गति विमल | कार्य विमल |
- माता विमल | पिता विमल |
- भगिनी विमल | बंधू विमल |
- दृष्य विमल | अदृश्य विमल |
- सगुण विमल | निर्गुण विमल |
- साकार विमल | निराकार विमल |
- विश्व विमल | दर्शन विमल |
- वाहिले तिजसी मी | मम ह्रदय पद्मकमल |
- — २३ मार्च २००९
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६
- विश्वाकार विमला, ब्रम्हांडभरी पसरली |
- ह्रदयकुटीत माझ्या | आत्माकार गमली |
- दर्शन घडता तिचे | मम शरीर सर्व व्यापिली |
- निजरूप खूण दावुनी | निजरुपातच लपली |
- — २३ मार्च २००९
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७
- दीदी माँ विमलाजी, स्मरतो ध्यानामाजी |
- पावन चरणकमला, पूजितो मनामाजी |
- घडले दर्शन मजला, शिवकुटी अबूमाजी |
- बोध त्यांचा मजला, विविध प्रवचानांमाजी |
- कृपादृष्टी मजला, प्रेमळ नेत्रांमाजी |
- स्मरणात अखंड मजला, बोल कानांमाजी |
- ठेवा सर्व बहुमोला, जपतो हृदयामाजी
- तेणेची दर्शन मजला, अखंड दीदी माँ विमलाजी |
- — २३ मार्च २००९
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८
- विश्वाकार विमला | उपदेशितसे मजला |
- आत्मरूप तू सजला | देहभाव वृत्तिसी रमला |
- चल जाण निजरुपाला | आत्मरूप स्वरुपाला |
- मनी अखंड लक्षी त्याला | साधना हीच जाण मनीला |
- विराम त्यासी जरी झाला | जाणीव होता त्वरि धरी त्याला |
- जरी अशा रिती अभ्यासिला | अखंड रमशील त्या अनुभवाला |
- हा बोध ऐकुनी मजला | आशिर्वाद जणू अर्पिला |
- धन्य मजसी मी गमला | वाटते सहजी गाठीन निज ध्येयाला |
- — २३ मार्च २००९
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९
- विश्वाकार विमला | सुकन्या भारतभू ला |
- अरविंदासम योगी | योगिनी की ही विमला |
- सोडुनी देशकार्याला | रतली आत्मरुपाला |
- सोडुनी स्थुलातले कार्य | झटली आत्मोद्धाराला |
- योगी अरविंद जेवी | राहिले पाँडीचेरीला |
- योगिनी तशीच ही विमला | राहिली पहाड़ अबूला |
- ध्यास असे दोघांही | दिव्य भारतभू करण्याला |
- देशभक्ति अन् प्रेमा | नच शब्द वर्णायाला |
- आज विश्वाकार दोंही | अविरत खंड न त्या कार्याला |
- दीपस्तंभ ते असती | मज दिसती दो बाजूला |
- आधारे त्यांच्या मजसी | वाटते सुलभ मम ध्येयाला |
- योगी अन् योगिनी ही | अलंकार भारतभू ला |
- — २४ मार्च २००९
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१०
- विश्वाकार विमला | सामर्थ्य कळे ते आज मजला |
- दृष्टीस जीव जरी पडला | निजकरे घट्ट धरी त्याला |
- आज वदलो या सत्याला | घेतसे त्या अनुभूतिला |
- क्षणभरीही न सोडते मजला | माता जणू निजशिशूला |
- काय उरले कारण मग मजला | हित अखंड लक्षितसे विमला |
- अंतरी उदय शुद्ध भावाला | अंतरीच नमन मज विमला |
- — २४ मार्च २००९
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११
- विश्वाकार विमला | सोऽहं श्वास गमला |
- धरिता सोडीता होते | स्मरण अखंड विमला |
- आवागमन जणू होते | ह्रदयकुटी ते ‘शिवकुटी’ला |
- स्मरण अखंड असे हो घडते | मज दीदी माँ विमला |
- — २४ मार्च २००९
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१२
- विश्वाकार विमला | सोऽहं श्वास आवागमला |
- स: भाव तो विमला | अहम् भाव तो मजला |
- धरिता स: रुपाला | अनुभवत असे विमला |
- अहम् भाव जरी आला | स्वरूपी ओढीतसे विमला |
- सूक्ष्मत्वे माता विमला | करितसे अशा खेळाला |
- कृपेच्या अशा रितीला | नमन दीदी माँ विमला |
- — २४ मार्च २००९
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१३
- विश्वाकार विमला | जीवनगाथा विमला |
- आदर्शवाद कथिला | जीवनी तोच आचरिला |
- बोले तैसा चाले | प्रत्यय दर्शना आला |
- सत्यनिष्ठ प्रायोगिकता | मिलाफ सुंदर दिसला |
- जीवन असेच जगण्याला | मी आशीर्वाद मागितला |
- विमल मातृहृदयाने | मजसी सत्वरचि तो दिधला |
- — २४ मार्च २००९
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१४
- विश्वाकार विमला | राखीतसे वृत्तीला |
- आत्म्यावरुनी ढळताचि | परतवितसे तिजला |
- ध्यानी बैसता येतसे | हा अनुभव मजला |
- सूक्ष्मात ती परतता | काय वर्णू सामर्थ्याला |
- — २४ मार्च २००९
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॥ वैराग्यमठी संजीवनस्थिती, श्री गुरुदत्त कृष्ण सरस्वती ॥
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